आजादी के 75 वर्ष बाद भी नहीं बन पा रहा है शिलाई के टोंस नदी पर पुल आखिर हिमाचल और उत्तराखंड सरकार कब देगी जनता को राहत ?…..

आजादी के 75 वर्ष बाद भी नहीं बन पा रहा है शिलाई के टोंस नदी पर पुल आखिर हिमाचल और उत्तराखंड सरकार कब देगी जनता को राहत ?….

आज हम सभी शिलाई वासियों के लिए बहुत ही दुखद विषय है कि हमारे शिलाई क्षेत्र के मोराड गांव टोन्स नदी के किनारे बना लचकदार झुला हिमाचल और उत्तराखंड राज्य से जोड़ता है जहां आजादी के 75 वर्ष बाद भी पुल नही बन पा रहा है जबकि भारत सरकार ओर विभिन्न राज्यों की सरकारें हर नदियों पर ऐतिहासिक पुलो का निर्माण कर चुका है और अनेकों नदियों के निकट पुलो निर्माण कार्य का कार्य प्रगति पर है परन्तु टौंस नदी पर आज भी स्थानीय लोगों को मौत ओर ज़िन्दगी से जुझना पड रहा है जिसके निकटम अनेकों पंचायतों का एक बड़ा क्षेत्र इस नदी के किनारे बसा हुआ है जिसमें मोराड, कुसेनु, बाली, कोटि, पारली फोराड, बशवा, बैला, इत्यादि एक बहुत बड़ा क्षेत्र इस नदी के किनारे बसा है और इस क्षेत्र की जो नगदी फसलें हैं जो पूरे हिमाचल में विख्यात है वैला वशवा की सौंठ, अदरक, और अनैको प्रकार की सब्जियों के लिए भी प्रसिद्ध है जहां पर अगर वर्तमान में एक पुल बना होता तो टौंस नदी के दूसरे किनारे कुआनु जो उत्तराखंड राज्य में स्थापित है पर ले जाने के लिए बहुत ही सुगम और सस्ता मार्ग आम लोगों और दोनों राज्यों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय ओर फैसला स्थापित होता यहां देखने वाली बात यह भी है कि इसी टौंस नदी पर किशाऊ बांध बनना भी प्रस्तावित है जो कदाचित एशिया का सबसे बड़ा बांध बनना निश्चित हुआ है परन्तु इतने वर्षों बाद भी अभी तक इस क्षेत्र में कोई भी जमीनी स्तर पर आजतक विशेष कार्य 

धरातल पर उतारने की इच्छा शक्ति ना तो हिमाचल प्रदेश सरकार दिखा पा रही है और ना ही उत्तराखंड सरकार बस सरकारों का आपस में वार्तालाप, संवाद आपस में समय समय पर जारी है और जनता को झूठे आश्वासनों के अलावा आज तक कुछ भी नसीब नहीं हो पा रहा है आज जहां हमारे देश और प्रदेश में काफी हद तक बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं तो वहीं गिरिपार के दुर्गम क्षेत्र शिलाई में टौंस नदी पर आज भी आमजनता बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है जहां पर एक पुराने से झुले में एक राज्य से दूसरे राज्य उत्तराखंड जाने के लिए ओर अपनी नगदी फसलों और खुद को नदी पार करने के लिए मौत के इस झूले में जाना पड़ता है और इस झुकी ना ही कभी तक मुरम्मत हो पाईं है जिस झुले पर आजकल कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं और यही एक मात्र मार्ग है जहां से हम उत्तराखंड राज्य में प्रवेश कर पाते हैं परन्तु आज भी हम बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है हमारे समस्त शिलाई क्षेत्र से अनेकों घरों से नदी के उस पार कुआनु में रिश्तेदारिया कई वर्षों से चली आ रही है जहां पर अगर एक ऐतिहासिक पुल का निर्माण हो जाएं तो गागर में सागर भरने वाली कहावत चरितार्थ होनी सुनिश्चित है आज हम सभी गिरिपार की समस्त जनता ओर समस्त पंचायतों के आमजन हिमाचल प्रदेश की नई सरकार और उत्तराखंड सरकार से आग्रह और निवेदन करतें हैं कि हमारे इस उचित ओर ऐतिहासिक निर्णय को अमलीजामा पहनाने की इच्छाशक्ति दिखाए ताकि हिमाचल और उत्तराखंड नंदी पर बसी टौंस नदी पर आमजनता के जीवन और भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक पुल का निर्माण किया जाएं और साथ ही हमारे ओर कुआणु उत्तराखंड के क्षेत्र के साथ हमारी संस्कृति, रिति रिवाज़ ओर व्यापार इत्यादि भी वर्षों से चला आ रहा है आज हम सभी शिलाई वासियों को शिलाई के विधायक और हमारे विधानसभा क्षेत्र से ही हिमाचल प्रदेश सरकार में उधोग संसदीय ओर आयुष मंत्री ठाकुर हर्षवर्धन चौहान जी से भी उम्मीद ओर अपेक्षाएं हैं कि आप हमारे इस गंभीर मुद्दे को हल करने के लिए विशेष पहल करेंगे और हिमाचल प्रदेश सरकार ओर उत्तराखंड सरकार के साथ जल्द सरकार के स्तर पर विशेष प्रयास करेंगे ताकि भविष्य में हमारे इस नदी पर एक ऐतिहासिक पुल का निर्माण हो पाए और दोनों राज्यों के आर्थिक, सामाजिक, ओर सांस्कृतिक स्तर पर भविष्य में और तरक्की और सामंजस्य देखने को मिलें हम उम्मीद करते हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार इस गंभीर विषय पर जरूर कुछ सकारात्मक परिणाम भविष्य देखने को मिलेंगे.. स्वतंत्र लेखक – हेमराज राणा