खालसा पंथ का स्थापना दिवस पर पांवटा ऐतिहासिक गुरुद्वारा में आयोजन

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खालसा पंथ का स्थापना दिवस परसों का ऐतिहासिक गुरुद्वारा में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं दरअसल 13 अप्रैल 1699 में बैसाखी के पर्व के दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। आज के दिन ही गुरु गोबिंद सिंह ने सबसे पहले 5 प्यारों को अमृत पान करवाया था। साथ ही पांच प्यारों के हाथों से स्वयं भी अमृत पान किया था।

 

पोंटा साहिब ऐतिहासिक गुरुद्वारा के पूर्व मैनेजर कुलवंती सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह का बचपन का नाम गोविन्द राय था । उनका जन्म 1666 में पौष सुदी सप्तमी को पटना शहर में हुआ। उनके जन्म के समय गुरु तेग बहादुर असम में थे। बाद में पंजाब लौटने पर उन्होंने परिवार को पंजाब ही बुला लिया।

 

उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा पोंटा साहिब में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया। गुरुद्वारे में सुबह पांच बजे संपूर्ण आशा की वार का कीर्तन के बाद अखंड पाठ साहिब की समाप्ति कीर्तन दरबार सजाए गए। अन्य राज्यों से आए ज्ञानी ने शबद व्याख्या कर बैसाखी का महत्व बताया। गुरुद्वारा साहिब के ज्ञानी हरमीतसिंह ने शरबत के भले की अरदास की।

खालसा पंथ का स्थापना दिवस है बैसाखी

 

सिखोंके दसवें गुरु गोबिंदसिंह ने 317 साल पहले 1699 में बैसाखी के दिन अानन्दपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसके उपलक्ष में सिख समाज बैसाखी पर्व को खालसा पंथ के स्थापना दिवस के रूप में मनाता है। गुरु गोबिंदसिंहजी ने पंथ की स्थापना के समय कुछ नियम भी बनाए थे जो हर गुरु के सिख का फर्ज है कि वो गुरु के बनाए नियमों का पालन करे। जो बोले सो निहाल सतश्री अकाल राज करेगा खालसा जैसे नारों से गूंजा गुरुद्वारा

 

बाइट कुलवंत सिंह पूर्व मैनेजर…