जौनसार के पिंगवा गांव में हुआ कमरऊ के दाईयों का महामिलन

जौनसार के पिंगवा गांव में 12 साल बाद होने वाला शांत महायज्ञ सम्पन्न हुआ। इस महायज्ञ में माता ठारी देवी की परंपरागत पूजा अर्चना के साथ गांव के बिरादरी यानी दाईयों का भी महामिलन हुआ। पिंगवा के ग्रामीण मूलतः कमरऊ से स्थाननन्तरित हुए हैं, लिहाज कमरऊ से महायज्ञ में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में बिरादरी भाई यानी दाई पहुंचे। BF

 

पिंगुआ गांव के शांत महायज्ञ में पहाड़ी संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिल रही है। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ यह गांव में चार गांवों के दाई भाइयों के मिलन की नई इबारत लिखी गई। यह पहली बार हुआ है जब पिंगवा में कमरऊ गांव के अलावा जौनसार के कावा खेड़ा और अरनत के बिरादरी भाईयों का पिंगवा से एक साथ मिलन हुआ। इन सभी गांव के लोग मूल रूप से कमरऊ निवासी है।

 

यहां गौरतलब यह है कि यह सब गांव ऐतिहासिक गांव कमरऊ के लोगों ने सदियों पहले इन स्थानों पर आकर बसाए हैं। यही कारण है कि इन गांवों के ग्रामीणों को कमरऊ के दाई भाई कहा जाता है।

पिंगवा पहुंचने तीन गांव के दाइयों का यहां वेदमंत्रों के साथ फूल मालाओं, पारम्परिक बाध्य यंत्रों की धुनों और बंदूकों की सलामी के साथ भब्य स्वागत हुआ। साथ ही शक्ति स्वरूपा माता ‘ठारी देवी’ के आवाहन के पारम्परिक जयकारे लिम्बरो के साथ विधिवत पूजा की गई ।

 

चार गांवों के दाइयों के मिलन को उल्लास में डूबे लोगों ने नाच गाकर यादगार बनाया। पिंगवा के स्याणा इंदर सिंह तोमर, प्रधान किशन सिंह तोमर और कमरऊ गांव के प्रधान मोहन ठाकुर ने इस मिलन को ऐतिहासिक और सदैव स्मरणीय बताया।

 

प्रबुद्ध जनों ने बताया कि मूल रूप से कमरऊ के विभिन्न गांव में बसे ग्रामीण एक दूसरे से अनजान थे लेकिन अब इतिहास को खंगाला जा रहा है और कमरऊ के दाई भाई दुबारा से एक होते जा रहे हैं। मिलन की खासियत यह रही कि जिस गर्मजोशी से पिंगवा वासियों ने दाइयों का स्वागत किया था, उसी तरह नाचते गाते, भारी मन और नम आंखों से जल्द दुबारा मिलना का वादा कर विदाई भी दी।