दालचीनी को “दालचीनी” क्यों कहते हैं, जब कि ना दाल है ना चीनी है ?

दालचीनी शब्द चीनी वाला पेड़ यानि मीठी डाल से बना है! दालचीनी का स्वाद मीठापन लिये होता है !

 

दालचीनी चाय, कॉफी, केक, एपल पाई, डोनट, सांभर पाउडर इत्यादि में प्रयोग लिया जाता है !

 

दालचीनी की छाल मसाले के लिये काम में ली जाती है और इसके पत्ते से सुगंधित तेल बनाया जाता है !

 

गरम मसालों में दालचीनी का उपयोग भारत में हजारों वर्षों से होता आ रहा है। इसका वर्णन संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों में भी प्राप्त होता है। इतिहास के अध्ययन से भी ज्ञात होता है कि भारत से इसका निर्यात अरब, मिस्र, ग्रीस, इटली और यूरोप के सभी देशों में होता था !

 

दालचीनी का उपयोग बहुत सारी बीमारियों के इलाज में किया जाता है !

 

हिचकी की परेशानी, अधिक कोलेस्ट्रॉल, सिरदर्द, सर्दी जुकाम, मधुमेह, मोटापा, दांत दर्द, आँखों के रोग में दालचीनी का पाउडर काम लिया जाता है ! यह गर्म तासीर का होता है !

 

शहद और दालचीनी का मिश्रण वाइरल फीवर को कम करने में सहायक हैं

दालचीनी का काढ़ा खाँसी को दूर करता है !

 

दालचीनी का तेल रूई पर लगाकर दाँतो पर लगाने से दाँत दर्द में राहत देता है !