पांवटा साहिब- सिरमौर के चूना पत्थर कारोबार को रोज 30 लाख का घाटा

पिछले छह दिन से पांवटा साहिब-शिलाई एनएच-707 कच्ची ढांक के पास बंद होने से सिरमौर का पत्थर उद्योग प्रभावित हो गया है। कारोबार ठप होने से प्रतिदिन 30 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। इसके अलावा दो से तीन लाख रुपये के सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में कारोबार से जुड़े 150 मजदूरों को खाने के लाले पड़ने लगे हैं। सतौन उत्तरी भारत की सबसे बड़ी चूना मंडी है। प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में चूना पत्थर सप्लाई किया जाता है। पांवटा साहिब, शिलाई और रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र में चूना पत्थर की खानें हैं। जहां से रोजाना लाखों का कारोबार होता है। इस कार्य में 200 के करीब छोटे बड़े ट्रक संचालक भी जुटे हैं। इससे उनके रोजगार पर भी सीधा असर पड़ा है।

सरकार को भी यहां से रोजाना लाखों का राजस्व प्राप्त होता है। सतौन, कमरऊ, पुरुवाला में कई दर्जनों लघु उद्योग स्थापित हैं। जहां पर मुख्य रूप से पॉल्ट्री ग्रिट और ग्लास उद्योग में उपयोग होने वाला पाउडर तैयार हो रहा है। यहां से रोजाना, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में चूना पत्थर और इससे तैयार पाउडर की सप्लाई होती है। इसके अलावा प्रदेश के बद्दी, कालाअंब और पांवटा साहिब में चूना पत्थर की खपत होती है। इस उद्योग से हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जो एक हफ्ते से बेरोजगार हैं।

 

सतौन क्षेत्र में रोजाना 1,000 टन चूना पत्थर बेचा जाता है। जबकि 1,500 टन के करीब माइन से चूना पत्थर निकाला जाता है। जबकि पुरुवाला में रोजाना 1,000 के करीब चूना पत्थर का उत्पादन होता है जो बरसात के तीन महीने नहीं हो पाएगा। पुरुवाला से रोजाना 600 टन चूना पत्थर बेचा जाता है। सतौन में उत्पादन और बिक्री पिछले एक हफ्ते से बंद है। उद्योग मालिक कुलदीप अग्रवाल, आदर्श बंसल और संजय मालपानी ने बताया कि एक हफ्ते से कोई सप्लाई नहीं हो पाई है। कच्ची ढांक के खुलने का इंतजार है। रोजाना ग्लास उद्योग से माल भेजने को लेकर फोन आ रहे हैं। तहसीलदार ऋषभ शर्मा ने कहा कि सड़क खोलने के लिए मशीनें लग गई हैं। अभी भटरोग सड़क यातायात के लिए खोलने पर जोर दिया जा रहा है।