पांवटा सिविल अस्पताल में टीवी की मरीज का मुक्ति इलाज

पांवटा साहिब
पांवटा सिविल अस्पताल में टीवी की मरीज का मुक्ति इलाज
 
टीवी से घबराएं नहीं डॉक्टर की सलाह लें और मुक्त उपचार करवा
टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब बेहतरीन प्रबंध शुरू हो गए हैं वहीं अगर पांवटा सिविल अस्पताल की बात की जाए तो यहां पर भी टीवी के मरीजों के लिए मुक्त इलाज ओर मुक्त टिके लगना शुरू हो गया है ताकि टीवी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का समय पर इलाज हो सके।
पांवटा सिविल अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर अंकुर धीमान ने मीडिया को जानकारी देते हो बताया कि 60 वर्ष ऊपर की आयु के लोगो मे सिविल अस्पताल में मुक्त टीकाकरण किया जा रहा है इसके अलावा टीवी की बीमारी से पीड़ित लोगों को आशा वर्कर द्वारा ढूंढ कर सिविल अस्पताल में उनका उपचार करवाया जा रहा है अभी तक सो बुजुर्गों को मुफ्त में टिका लग चुके हैं तो 200 के करीब लोगों का सिविल अस्पताल उपचार चल रहा है।उन्होंने कहा कि टीवी के मरीजों को घबराना नहीं चाहिए इसका समय पर इलाज कारण तो यह बीमारी ठीक हो सकती है
उन्होंने कहा कि टीवी ऐसा रोग है जो शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है, लेकिन आमतौर पर यह फेफड़ों, लिंफ ग्‍लैंड्स, हडि्डयों, पेट, मस्तिष्‍क और जेनाइटो-यूरिनरी सिस्‍टम को सबसे ज्‍यादा प्रभावित करता है। टीबी से फेफड़े सबसे ज्‍यादा प्रभावित होते हैं और यह संक्रमण मुख्‍य रूप से एक संक्रमित व्‍यक्ति से दूसरे को फैलता है।
ट्यूबरक्‍लॉसिस के सामान्‍य लक्षणों में लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार, जो आमतौर पर शाम को शुरू होता है, भूख की कमी, वज़न गिरना, कमज़ोरी महसूस होना और रात में पसीना आना शामिल हैं। फेफड़ों के ट्यूबरक्‍लॉसिस में लंबे समय तक खांसी, बलगम के साथ खून, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े में दर्द हो सकता है।
टीबी के चेतावनी के संकेत क्या हैं?
 
टीबी के इन चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज न करें
दो हफ्ते या उससे ज्यादा दिनों तक लगातार खांसी होना: अगर खांसी लगातार 15-20 दिनों तक रहती है, तो आगे टीबी के लिए जांच करवानी चाहिए। खांसने पर खून या बलगम आना: यह भी टीबी का एक और खतरनाक संकेत है। इससे संकेत का दिखने का मतलब है कि आपके फेफड़े इस जानलेवा बीमारी से इन्फेक्ट हो चुके हैं।
टीबी का उपचार क्या है?
डॉ अंकुर धीमान ने बताया  कि ट्यूबरक्‍लॉसिस के निदान और उपचार की सुविधा डॉट्स (DOTS) सेंटर्स पर व्‍यापक रूप से मुफ्त उपलब्‍ध है। सरकार भी ट्यूबरक्‍लॉसिस के मरीज़ों को इंसेन्‍टव्‍स प्रदान करती है इसलिए यह जरूरी है हम इस रोग से प्रभावित होने पर किसी भी लक्षण की अनदेखी न करें और न ही उन्‍हें छिपाने की कोशिश करें।
बाईट अंकुर धीमान