शिलाई के युवाओं के दिलों में राज कर रहे कुलदीप राणा

शिलाई के युवाओं के दिलों में राज कर रहे कुलदीप राणा

कोटि बौच मैं कबड्डी समापन पर मुख्य अतिथि कुलदीप राणा

युवाओं के दिलों की धड़कन कुलदीप राणा लगातार खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहे हैं दरअसल बैशाखी के उपलक्षय पर नवयुवक मंडल कोटि बौच द्वारा कबड्डी खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसके समापन समारोह मे बतौर मुख्यअतिथि कुलदीप राणा ने रहे जिसके समापन समारोह मे मंडल सचिव भाजपा श्री राजेंद्र चौहान जी ,कुलदीप शर्मा जी मीडिया प्रभारी भारतीय जनता पार्टी मंडल शिलाई व नाथूराम शर्मा जी जिला कार्यकारिणी सदस्य कबड्डी एसोसिएशन सिरमौर साथ में मौजूद रहे ।

कुलदीप राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि शिलाई का विकास करना और शिलाई विधानसभा क्षेत्र के युवाओं और युवतियों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करते हैं और करते रहेंगे उन्होंने कहा कि युवा देश का गौरव है युवाओं को खेल में अधिक से अधिक समय देने के लिए वह हमेशा प्रेरित करते हैं ताकि युवा पीढ़ी नशे से बच सके और अपने देश और अपने गांव और जिले रोशन करें।

वहीं उन्होंने नवयुवक मंडल कोटि बौच द्वारा किए गए भव्य स्वागत के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं और साथ ही एक सफल प्रतियोगिता आयोजन के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूँ ।

मुझे विश्वास है कि आप भविष्य में भी इसी प्रकार खेल प्रतियोगिताओ का आयोजन कर स्थानीय युवाओं को प्रेरित करते रहेंगे ताकि हमारे क्षेत्र के युवाओं को खेलो मे आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती रहे !!

खेलने से क्या-क्या फायदे हैं

 

खेल हमारे जीवन का आवश्यक हिस्सा है। स्वस्थ शरीर और दिमाग काे विकसित करने के लिए खेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल कई प्रकार के होते हैं, जाे हमारे शारीरिक के साथ मानसिक विकास में मदद करते हैं। लगातार पढ़ाई के दौरान कई बार तनाव की स्थिति होती है। ऐसे में खेल इस तनाव को दूर करने का बेहतर माध्यम है। हमारे देश में खेलों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती, जितनी शिक्षा को दी जाती है। जिस तरह दिमाग का सही विकास के लिए शिक्षा जरूरी है, उसी तरह शारीरिक विकास के लिए खेल महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा के माध्यम से हम टीम भावना नहीं सीख सकते, लेकिन खेल से यह संभव है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि कई स्कूलों में शिक्षा पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है लेकिन खेलों पर नहीं। कुछ स्कूल तो ऐसे हैं जहां खेल सीमित ही होते हैं। ऐसे में अभिभावक की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें अपने स्तर पर ही बच्चों को खेल से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। एेसे में जरूरत है हमें पढ़ाई के बराबर खेलों को महत्व देना चाहिए। स्कूल में खेलों को बढ़ावा देने के लिए इसे रेगुलर सब्जेक्ट की तरह नियमित एक्टिविटी करानी चाहिए।

 

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