शिलाई में नालों, खड्डों व आरक्षित वन भूमि पर फेंका जा रहा nh-707 की कटिंग का मलबा

प्रदेश में आई आपदा के बाद निर्माण और खनन के मलबे को लेकर प्रदेश सरकार ने सख्त आदेश जारी कर मलबे को ऐसी जगह पर डंप करने के आदेश पारित किए हैं जहां मलबे का सही निस्तांरण हो तथा भविष्य में उस मलबे से कोई नुकसान न हो। लेकिन एनएच-707 पर हो रही कटिंग का मलबा निर्माण कंपनी द्वारा डंपिंग साइट होने के बाद भी अपनी सुविधा व थोड़ी सी बचत के लिए बरसाती नालों, खड्डों व आरक्षित वन भूमि पर फेंका जा रहा है।

इस मलबे से जहां दुर्लभ वन संपदा, पेड़, हर्बल औषधीय जड़ी-बूटियों को भारी मात्रा में नुकसान हो रहा है। वहीं बरसाती नाले व खड्डों में भरे मलबे से खड्डों का रास्ता रुक गया है। सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखाकर बेखौफ एनएच-707 के पैकेज-1 में हैवना से सतौन के बीच आधा दर्जन जगह सडक़ निर्माण का हजारों टन मलबा सडक़ के बाहर आरक्षित वन भूमि व बरसाती नालों में फेंका जा रहा है। जबकि पैकज-दो में सडक़ कटिंग का मलबा बोहराड़ खड्ड आरक्षित वन भूमि में फेंका जा रहा है। पूरा खड्ड मलबे से भर गया है। दोनों साइड पर आधा दर्जन नालों व खड्डों का रास्ता बंद हो गया है। क्षेत्र में बरसाती पानी से यह मलबा भारी तबाही ला सकती है। निर्माणकर्ता कंपनियों वन विभाग और प्रशासन तो क्या सरकार के आदेश को भी दरकिनार कर कार्य में मनमानी कर रही है।

 

बोहराड़ खड्ड में फेंका मलबा

हैवना से सतौन के बीच आधा दर्जन जगह सडक़ निर्माण का हजारों टन मलबा सडक़ के बाहर आरक्षित वन भूमि और बरसाती नालों में फेंका जा रहा है। जबकि पैकज-दो में सडक़ कटिंग का मलबा बोहराड़ खड्ड आरक्षित वन भूमि में फेंका जा रहा है। पूरा खड्ड मलबे से भर गया है।

 

बरसात में घरों-जमीनों और सडक़ों पर आएगा पानी

बरसाती नालों में फेंके गए मलबे से नालों और खड्डों का रास्ता रुक गया है। बरसात के मौसम में जब बारिश होगी तो मलबा खड्डों से लोगों की जमीन, खेतों और मकानों में घुस जाएगा। इस वर्ष भी एनएच-707 के निर्माण के मलबे से सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि, फसलें, दर्जनों लोगों के मकान, पेड़-पौधे, पेयजल लाइनें मलबे की जद में आई हैं। आने वाले समय के लिए इस मलबे से क्षेत्र के लिए मानव निर्मित आपदा तैयार की जा रही है।

 

ग्रामीणों ने एसडीएम कफोटा से की शिकायत

कफोटा उपमंडल के तहत आने वाली इन दोनों साइट में रह रहे ग्रामीणों ने अवैज्ञानिक कार्य की शिकायत एसडीएम कफोटा से की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि महीनों से चुप्पी साधे प्रशासन व वन विभाग मामले में कार्रवाई करे अन्यथा ग्रामीणों को न्यायालय में जाने को विवश होना पड़ेगा।

 

शिकायत पर हो रही सख्त कार्रवाई

वन मंडल अधिकारी रेणुकाजी उर्वशी ठाकुर ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है। मामले में कार्रवाई की जा रही है। उधर एसडीएम कफोटा राजेश वर्मा ने ग्रामीणों की शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि निर्माणकर्ता के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।