हिमाचल pradesh-मायानगरी की टीम गिरिपार की लोक संस्कृति पर बना रही है फ़िल्म “खूंटा”

मुंबई मायानगरी की टीम गिरिपार की लोक संस्कृति पर बना रही है फ़िल्म “खूंटा”

जिला सिरमौर के गिरिपार के कल्चर, लोक संस्कृति के ऊपर “खूंटा” फ़िल्म बनने जा रही है,

जिसमे पहाड़ो में रहने वाले लोगो की कड़ी मेहनत और अब तक संजोए रखे पौराणिक संस्कृति की झलक नजर आने वाली है, फ़िल्म की कहानी 1990 के दशक में हिमाचल के एक दूरदराज के गांव पर आधारित है।

इस फ़िल्म में मुख्य रोल में गिरिखण्ड के दूरदराज के गांव द्राबिल से संबंध रखने वाली अन्नू शर्मा नजर आएगी, अन्नू शर्मा का जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण रहा है………

उन्होंने बताया कि फ़िल्म बनाने का उद्देश्य गिरिखण्ड क्षेत्र के पारम्परिक कल्चर, जिसको आधुनिक युग मे भी यहाँ के लोगों ने संजोए रखा है, तथा चाँदपुरधार जैसे अन्य कई ख़ूबसूत जगहों को प्रमोट करना है, सूख सुविधाओं के अभाव के कारण यहाँ के लोग अपने हुनर को पीछे छोड़ केवल कुछ ही क्षेत्र में अपना कैरियर तलाशना पड़ता है, एक्टिंग जैसे क्षेत्र में आज भी यहाँ के कोई भी लोग नही जाते हैं, फ़िल्म में गिरिखण्ड के लोगों का संघर्षपूर्ण जीवन दिखाया जाएगा और फ़िल्म सिटी जैसी बड़ी सौगात को शिलाई में विकसित करने से क्षेत्र में टूरिज्म ओर एक्टिंग में रुचि रखने वाले लोगों को काफी बढ़ावा मिलेगा, उन्होंने अपना सपना पूरा करने के लिए जितना संघर्ष किया है, भविष्य किसी को न करना पड़े।

 

उन्होंने बताया कि फ़िल्म का एक पार्ट बूढ़ी दीवाली के कल्चर पर भी आधारित है, इसलिए उन्होंने क्षेत्र के लोगों को द्राबिल की बूढ़ी दीवाली में सभी लोगो से पारंपरिक लिवाज पहन कर आने का आग्रह किया है, माया नगरी से डायरेक्टर व एक्टर की पूरी टीम द्राबिल गांव पहुँच गए है, एक्टर ईशान आजाद, प्रेरणा ठाकुर, मनोज वालिया, प्रणय कोहली, अंशु, मोहन व कार्तिक राव मुख्य किरदारों में नजर आने वाले हैं।

 

उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रधान मदन सिंह, पूर्व प्रधान बस्ती राम, बंसी राम, लाखी राम, चंदन सिंह व गबदोऊ भाईचारे का फ़िल्म बनाने में व्यवस्था का पूर्ण सहयोग मिल रहा है।

 

इस फ़िल्म में मुख्य रोल में गिरिखण्ड के दूरदराज के गांव द्राबिल से संबंध रखने वाली अन्नू शर्मा नजर आएगी, अन्नू शर्मा का जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण रहा है, जिनकी प्राथमिक शिक्षा सीसे स्कूल द्राबिल से हुई, क्षेत्र में कॉलेज की सुविधा न होने से पढ़ाई के लिए सोलन जाना पड़ा, जहाँ से उन्होंने विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की, उसी दौरान उन्होंने थियेटर जॉइन किया, थियेटर में बेस्ट एक्टिंग के लिए तीन मैडल प्राप्त किए, जिसके बाद कुछ अलग करने की ठानी और हिमाचल के पहाड़ों में बसे दूरदराज गांव की एक लड़की एक्टिंग का सपना लेकर माया नगरी मुंबई जा पहुचीं, आशियाने की तलाश में संघर्ष के 11 दिनों तक माया नगरी में गुजरे, छोटे से गांव से कोसों दूर अपने अरमानो को पूरा करने पहुचीं अदाकारा के कैरियर की शुरूआत हुई।

अन्नू शर्मा ने बताया कि मुम्बई की फ़िल्म सिटी में कई साल संघर्ष करने के बाद अपने गांव, क्षेत्र की संस्कृति के ऊपर एक फ़िल्म बनाने का अवसर मिला है, जिसमे शिलाई और पैतृक गांव द्राबिल के गबदोऊ भाईचारे, बूढ़ी दीवाली, व ओर भी बहुत सारे पहाड़ी रीतिरिवाज, खानपान, संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।