पांवटा साहिब की विश्व भर में अलग पहचान, सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बसाया था शहर

पांवटा साहिब की विश्व भर में अलग पहचान, सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बसाया था शहर…

 

पांवटा साहिब इतिहास के झरोखे से हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर बसा हुआ एक कस्बा है। यमुना नदी के किनारे बसे पांवटा साहिब को सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बसाया था। इस जगह के बारे में कहते हैं कि इसका नाम पहले पाओंटिका था। पांवटा का मतलब है पैर, इस जगह का नाम इसके अर्थ के मुताबिक देखें तो बेहद अहम है। माना जाता है कि अपने घोड़े से सिक्ख गुरु गोबिंद सिंह जी जा रहे थे और इसी जगह पर आकर उनके घोड़े ने अपने पैर जमा लिए तो गुरु गोबिंद सिंह जी ने पाओं और टीके को जोडक़र पांवटा का नाम दिया।

 

 

By: Divyahimachal Jan 23rd, 2023 12:18 am

 

 

 

 

पांवटा साहिब की विश्व भर में अलग पहचान, सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बसाया था शहर

 

पांवटा साहिब इतिहास के झरोखे से हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर बसा हुआ एक कस्बा है। यमुना नदी के किनारे बसे पांवटा साहिब को सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बसाया था। इस जगह के बारे में कहते हैं कि इसका नाम पहले पाओंटिका था। पांवटा का मतलब है पैर, इस जगह का नाम इसके अर्थ के मुताबिक देखें तो बेहद अहम है। माना जाता है कि अपने घोड़े से सिक्ख गुरु गोबिंद सिंह जी जा रहे थे और इसी जगह पर आकर उनके घोड़े ने अपने पैर जमा लिए तो गुरु गोबिंद सिंह जी ने पाओं और टीके को जोडक़र पांवटा का नाम दिया।

 

 

गुरु जी ने इसी जगह गुरुद्वारा स्थापित करवाया और अपने जीवन के साढ़े चार साल यहीं रहे। गुरुद्वारे के भीतर श्रीतालाब स्थान है जहां से गुरु जी वेतन बंटा करते थे और गुरुद्वारे में श्रीदस्तर जगह है जहां गुरु जी पगड़ी बांधने के कंपीटीशन में जज हुआ करते थे। हिमाचल प्रदेश के दक्षिण में यमुना नदी के तट पर स्थित गुरु की सुंदर नगरी पांवटा साहिब की विश्व भर में अलग पहचान है। सर्वधर्म समभाव के रूप में शहर ने एक मिसाल कायम की हुई है। चाहे गुरु पर्व हो या श्री जगन्नाथ यात्रा, ईद हो या दिवाली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हो या क्रिसमस, वाल्मीकि जयंती हो या दुर्गा पूजन या बिहारी समुदाय का छठ पर्व व महाशिवरात्रि पर्व हो सब सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाए जाते हैं। औद्योगिकीकरण के कारण यहां पर पूरे देश भर से लोग बसे हुए हैं, जिससे साल भर के पर्व के दौरान यहां पर अनेकता में एकता की झलक दिखाई पड़ती है। पांवटा साहिब शहर वार्ड-1 से लेकर वार्ड-13 में बंटा हुआ है, जबकि जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ रहा है। उसके मुताबिक शहर का विस्तारीकरण, जिस तेज गति से होना चाहिए था वह नहीं हो पा रहा है। इस कारण शहर तेजी से सिकुड़ता जा रहा है। हालांकि शहर दूर-दूर तक फैल चुका है और नगर परिषद के दायरे से बाहर और आसपास की पंचायतों में घनी आबादी वाली कालोनियां बस गई हैं।

 

यहां पर औद्योगिकीकरण के कारण रोजगार और शिक्षा के लिए लोगों का आना लगातार जारी है। यही कारण है कि पांवटा साहिब प्रदेश में क्राइम के मामले में अग्रणी स्थान पर रहता है। मु_ी भर पुलिस कर्मी शहर की करीब 50 हजार आबादी की रखवाली कर रहे हैं। इसके अलावा एक्सीडेंट व अन्य मामलों को निपटाने में ही उनका ज्यादातर वक्त गुजर जाता है। शहर में स्थापित पुलिस थाने में वर्ष 1978 के स्वीकृत पदों पर ही अब तक कानून व्यवस्था चल रही है। उस समय नगर की आबादी करीब 10 हजार रही होगी, लेकिन आज यह पांच गुणा से भी अधिक हो गई है और स्वीकृत पदों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। ऐसे में पुलिस कर्मी भी वर्क लोड में पिस रहे हैं।

 

ऐसे में यह समय की जरूरत बन गई है कि पांवटा साहिब में भी बीबीएन की तर्ज पर एसपी जिला बनना चाहिए। वैसे सरकार ने बढ़ते आपराधिक घटनाओं को देखते हुए माजरा पुरुवाला में दो थाने खोले हैं। उसके बावजूद भी पुलिस कर्मियों की कमी के चलते पुलिस को अपराध रोकने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। गैर कानूनी अवैध कब्जा जैसे छोटे-बड़े व्यवसायियों की आदत सी बन गई है। गाडिय़ों को मनचाही जगह पर खड़ा कर देना भी समस्या पैदा करता है। पांवटा शहर की सबसे बड़ी खासियत है कि यह नगर तीन नदियों के बीच बसा हुआ है। जिनमें प्रमुख रूप से यमुना नदी है। पांवटा साहिब प्रदेश का एकमात्र नगर है जहां से होकर यमुना नदी गुजरती है। यह नदी पूर्व से पश्चिम की और नगर के दक्षिण भाग से होकर गुजरती है। वहीं दो अन्य नदियों में बाता नदी और गिरि नदी है। गिरि नदी नगर के पूर्वी छोर में और बाता नदी पश्चिमी छोर से होकर निकलती है। औद्योगिकीकरण के कारण बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की उपयुक्त पहचान न हो पाने के कारण क्राइम रेशों भी बढ़ रही है। पांवटा नगर में पार्किंग एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है। इसके समाधान के लिए नगर परिषद भी प्रयास करने लगी है। अगले दो वर्षों के भीतर नगर परिषद एक ऐसा पार्किंग स्थल तैयार करना चाहती है जहां पर हजारों छोटे-बड़े वाहन खड़े किए जा सकें। (एचडीएम)

 

यमुना बन सकती है आकर्षण का केंद्र

पर्यटकों के लिए पांवटा में अभी तक ऐसा कोई उपयुक्त रमणीक स्थल नहीं उभरा है जहां सैलानी घूम सकें और यहां की सुंदरता का आनंद ले सकें। यहां पर नगर के किनारे बह रही यमुना नदी आकर्षण का केंद्र बन सकती है। पर्यटन निगम यदि पहल करे तो इस नदी में यमुनाघाट के पास एक सुंदर कृत्रिम झील का निर्माण किया जा सकता है, जिसमें बोटिंग का पर्यटक आनंद ले सकते हैं।

पार्किंग तैयार करवाने में जुटी नगर परिषद

नगर परिषद पांवटा साहिब के कार्यकारी अधिकारी अजमेर सिंह ठाकुर ने बताया कि वह नगर के विभिन्न स्थानों पर तो मल्टीप्लेक्स पार्किंग तैयार करवाने पर लगे हुए हैं। इसमें एमसी कांप्लेक्स के पीछे की पार्किंग का कार्य शुरू हो चुका है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

 

होली मेले में उमड़ती है भीड़

ऐतिहासिक धार्मिक नगरी पांवटा साहिब में विश्व विख्यात गुरुद्वारा साहिब में नववर्ष, लोहड़ी, होला मोहल्ला, बैसाखी, हेमकुंड साहिब यात्रा, चार धाम यात्रा, श्री जगन्नाथ यात्रा, यमुना शरद महोत्सव, ईद व अन्य हिंदू धर्म के त्योहार जैसे दिवाली, दशहरा, वामन द्वादशी, परशुराम जयंती, नगर कीर्तन व गुरु पर्व आदि मौकों पर एकाएक भीड़ बढ़ जाती है। मार्च माह में नगर परिषद के होली मेले और गुरुद्वारा साहिब के होला मोहल्ले पर पांवटा साहिब में वर्ष भर में सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है।