Paonta पहुंचा TIGER RO wildlife ने उठाए FOOTPRINT

Paonta पहुंचा TIGER RO wildlife ने उठाए FOOTPRINT

 

काफी दुर्लभ घटना…साथ ही ख़तरे की घंटी भी …

देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में टाइगर के पंजों के निशान पाए जाने का मामला सोमवार को सामने आया हैं जिसके फुटप्रिंट उठाने के लिए डीएफओ अंग्रीश मौके पर पहुंचे और उनके नेतृत्व में टाइगर के पंजों के फुटप्रिंट RO wildlifeकी निगरानी में उठाए।

 

 

डीएफओ कुणाल अंग्रीश ने बताया कि पांवटा साहिब के एक क्षेत्र में टाइगर के पंजों के निशान पाए गए हैं स्पोट विजिट कर उन्होंने फुटप्रिंट भी उठाए हैं और अधिकारियों तक भेजे हैं।

उन्होंने बताया कि राजाजी नेशनल पार्क में हरिद्वार रेंज के नजदीक टाइगर पाए जाते हैं कई वर्षों बाद टाइगर सिंबलवाड़ा और पांवटा साहिब के नजदीक फुटप्रिंट पाए गए हैं ।

 

उन्होंने बताया कि यह संभव है कि राजाजी नेशनल पार्क से टाइगर पावटा के नजदीक आए हो क्योंकि टाइगर की टैरेटरी एरिया काफी बड़ा होता है कई सौ किलोमीटर में है फैला होता है और यह संभव है कि टाइगर पावटा साहिब के नजदीकी क्षेत्र में आया हो।

उन्होंने बताया कि दरअसल यह टाइगर का ही पंजा लग रहा है क्योंकि इतना बड़ा पंजा और किसी जानवर का नहीं होता लेपर्ड या दूसरे जानवरों के मैक्सिमम बड़े पंजे इस से मेल नहीं खाते, यह संभव है कि यह टाइगर का ही पंजा है और इसकी जांच भी की जा रही है।

 

अमूमन हिमाचल प्रदेश में बाघ (Tiger) नहीं पाए जाते हैं, लेकिन पहली बार यहां बाघ की एंट्री दर्ज की गई है। वन विभाग को बाघ के पैरों के निशान मिले हैं। शिमला वाइल्ड लाइफ डिवीजन की तरफ से यह जानकारी दी गई है।

सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में बाघ के पैरों के निशान देखे गए हैं। यह काफी दुर्लभ घटना है। क्योंकि आज से पहले कभी भी हिमाचल में बाघ या उससे जुड़ी हुई कोई गतिविधि रिपोर्ट नहीं हुई है। विभाग का कहना है कि कैमरे से इलाके पर नजर रखी जा रही है।

 

दरअसल, जिस जगह बाघ के पैरों के निशान मिले हैं, वह इलाका सिंबलबाडा नेशनल पार्क के साथ सटा हुआ है। यह वन संरक्षित इलाका 19 किमी में फैला है और हरियाणा के साथ इसका बॉर्डर लगता है। 1958 में सिंबलबाडा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी अस्तित्व
में आई थी। इस इलाके में ज्यादातर गोरल, सांभर और चीतल पाए जाते हैं।