शनिवार के दिन करें ये उपाय, प्रसन्न होंगे शनिदेव और सभी प्रकार के शनिदोष से मिलेगी मुक्ति

शनिवार के दिन करें ये उपाय, प्रसन्न होंगे शनिदेव और सभी प्रकार के शनिदोष से मिलेगी मुक्ति

 

शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है. शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा सूर्यास्त के बाद फलीभूत मानी गई है. इस वक्त शनि का प्रभाव तेज रहता है. जो सच्चे मन से इस समय शनि की उपासना करता है वह उस भक्त पर अपनी कृपा लुटाते हैं।

शनि देव का नाम आते ही कई सवाल मन में उठने लगते हैं. शनि ग्रह का नाम सुनते हैं तो लगता है कि यह दुख-दर्द के ही कारक हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि ये कर्मों के अनुसार फल देते हैं. अगर आपकी कुंडली में यह ग्रह अशांत है तो शनि दोष से बचने और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा और व्रत रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन शनि देव का पूजन करने के भी कुछ विशेष नियम हैं, यदि इनमें भूल होती है, तो लाभ की जगह नुकसान होता है. ।

ईमानदारों के लिए सम्मान का ग्रह शनि

शनि देव को धर्म व न्याय का प्रतीक और सुख-संपत्ति, वैभव और मोक्ष देने वाला ग्रह माना जाता है. मान्यता है कि धर्मराज होने की वजह से प्राय: शनि पापी व्यक्तियों के लिए दुख और कष्टकारक होते हैं, लेकिन ईमानदारों के लिए यह यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है. शनि की दशा आने पर जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं. जानें पूजा करते समय किन बातों का रखना चाहिये ध्यान.।

तेल चढ़ाते समय रखें ये ध्यान

ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर शनिदेव की मूर्ति के पास तेल चढ़ाएं या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें. तेल चढ़ाने के दौरान इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें, कि तेल इधर-उधर न गिरे. वहीं शनिवार को काले तिल और गुड़ चींटी को खिलाएं. इसके अलावा शनिवार के दिन चमड़े के जूते चप्पल दान करना भी अच्छा रहता है।

सामने खड़े न होकर करें पूजन

पहले शनिदेव के मंदिर बहुत कम संख्या में होते थे, लेकिन आज जगह-जगह आपको शनिदेव के मंदिर मिल जाएंगे, जिनमें शनिदेव की मूर्तियां भी हैं. जब शनिदेव मंदिर में जाएं, तो कभी भी मूर्ति के सामने खड़े न हों. हो सके तो शनि देव के उस मंदिर में जाएं, जहां शनि शिला के रूप में हों. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करें.।

शनि देव की आरती

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव.