पांडवों के समय की अद्भुत प्राचीन गुफा…. हिमाचल के इस गाँव मे प्राचीन गुफा का रहस्य

देश में घूमने लायक जगहों की कोई कमी नहीं है। यहां एक से बढ़कर एक ऐसी जगहे हैं, जो अपनी खूबसूरती से लोगों का मन मोह लेती हैं। चूंकि भारत का इतिहास बेहद ही समृद्ध रहा है, इसलिए यहां घूमने लायक एतिहासिक जगहों की भी कोई कमी नहीं है, चाहे एतिहासिक इमारतें हों, महल, किले, मंदिर या गुफाएं ही क्यों न हों। वहीं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में एक अद्भुत प्राचीन गुफाएं हैं, जिनका इतिहास हजारों साल पुराना है। इन गुफाओं में आकर आपको ऐसा लगेगा, जैसे किसी और अपनी सारी परेशानियां भूल गए हों।

सिरमौर जिला के ट्रांस गिरी क्षेत्र के पोका पंचायत के कोटगा गांव में प्राचीन गुफा का इतिहास पांडवों के काल से जुड़ा हुआ है जहां पांडवों में अपना समय व्यतीत किया है और यहां से 500 मीटर दूर एक प्राचीन बावड़ी है जो कि हिमाचल की पहली ऐसी बावरी होगी जहां पर 12 तीर्थों का स्नान एक जगह होता है यहां पर जन्माष्टमी के दिन, व सोमवार की अमावस के दिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं स्नान करते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं साथ ही इस ऐतिहासिक गुफा का दर्शन भी करते हैं।

ऐसी प्राचीन जगहों को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं, क्योंकि यहां पांडवों के समय के इतिहास को बिल्कुल करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं तो आपको देश में मौजूद प्राचीन गुफाओं की सैर जरूर करनी चाहिए।

 

आसपास के लोगों ने बताया कि लंबे समय से गुफा का देखरेख ना होने की वजह से प्राचीन गुफा का इतिहास कुछ ही लोगों पता है आज भी यहां पर पांडवों द्वारा यहां पर बिताया गया समय के दौरान इस्तेमाल किए गए सामान जो कि पत्थरों से बनाए गए थे इस समय पर मौजूद है लेकिन देखरेख ना होने की वजह समान अब नष्ट होता जा रहा है।

 

वही बावड़ी का इतिहास बताएं तो विष्णु भगवान जी के नाम से प्रसिद्ध मंदिर है जो भी श्रद्धालु पहुंचा है उनके मनोकामना पूर्ण होती है और बावड़ी में तीन बार डुबकी लगाने से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं ऐसा यहां का इतिहास बताया जाता है इतना ही नहीं यहां पर जमीन के अंदर से जो पानी निकलता है और गर्मी या सर्दी या बारिश के मौसम में पानी ना तो होता है और ना ही बढ़ता है।