Himachal: सियासी संकट से सचेत मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने कांगड़ा में बढ़ाई सक्रियता

Himachal: सियासी संकट से सचेत मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने कांगड़ा में बढ़ाई सक्रियता

सधे कदमों के साथ संकट से पूरी तरह पार पाने पा लेने के साथ वह लोकसभा चुनाव के लिए के लिए सभी कील-कांटे भी दुरुस्त कर लेना चाहते हैं। सुक्खू जानते हैं कि सरकार को टिकाए रखने के लिए कांगड़ा का मजबूत आधार साथ होना जरूरी है।

राज्यसभा चुनाव के साथ ही अपनी सरकार पर उपजे संकट से सचेत मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में एकाएक सक्रिय हो गए हैं। सधे कदमों के साथ संकट से पूरी तरह पार पाने पा लेने के साथ वह लोकसभा चुनाव के लिए के लिए सभी कील-कांटे भी दुरुस्त कर लेना चाहते हैं। सुक्खू जानते हैं कि सरकार को टिकाए रखने के लिए कांगड़ा का मजबूत आधार साथ होना जरूरी है।

इसलिए, हिमाचल में सत्ता की धुरी कांगड़ा की सियासी पिच पर आम चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की फ्रंट फुट पर बैटिंग चर्चाओं में है।

मार्च के पहले पखवाड़े में ही सुक्खू 7 दिनों में कांगड़ा-चंबा के 10 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर लगभग 2050 करोड़ के विकास कार्याें की सौगात जनता को दे चुके हैं। सार्वजनिक मंचों से बागी और भाजपा विधायक सीएम सुक्खू के निशाने पर हैं। कांगड़ा से साथ खड़े अपनों में भरोसा जगाने की भी उनकी कोशिश है। मुख्यमंत्री जानते हैं कि कांगड़ा सीट में अच्छा कर गुजरने की संभावना भी दिख रही है। सुधीर को हटा दें तो संसदीय क्षेत्र के 17 में से 11 हलकों में कांग्रेस के विधायक काबिज हैं। संगठन की कमजोरियों और गुटबाजी का फीडबैक उनके पास है। इसलिए, कांगड़ा में अपना सियासी किला मजबूत करने के लिए वह खुद मैदान में हैं।

भेदभाव का मुद्दा किया खत्म
मुख्यमंत्री ने सत्ता की बागडोर संभालते ही कांगड़ा को एक कैबिनेट मंत्री, एक कैबिनेट रैंक और दो सीपीएस के पदों की सौगात दी थी। अब भेदभाव के सवालों को भी निस्तेज कर दिया है। यादविंद्र गोमा को मंत्री बनाने के अलावा उन्होंने एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री रैंक के ओहदे भी दिए हैं। भवानी पठानिया और केवल पठानिया को उन्होंने एडजस्ट कर दिया है।
सुक्खू के हालिया दौरे
मार्च विधानसभा क्षेत्र सौगात
06 देहरा, नगरोटा बगवां 784
08 बैजनाथ 49
11 इंदौरा 143
11 चुवाड़ी (चंबा) 75
12 चंबा 275
12 फतेहपुर 232
14 जयसिंहपुर, पालमपुर, सुलह 492